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जानिये महाकुंभ के बारे में, प्रयागराज में होता है अलौकिक और रिश्तों का संगम

यूपी के प्रयागराज में महाकुंभ मेले के शुरू होने में बस कुछ ही दिन बचे हैं। देश-विदेश के कोने-कोने से लोग यहां संगम में डुबकी लगाने आते हैं। प्राचीन हिंदू ग्रंथों में लिखा है कि करीब 2 हजार सालों से इसका आयोजन होता आ रहा है।

ये है वैज्ञानिक कारण

इतना ही नहीं कुंभ मेले को हिंदू धर्म का एक बड़ा पर्व भी माना जाता है। यह तो धार्मिक महत्व है, लेकिन आज इस खबर में आप जानेंगे कि क्या कुंभ का सिर्फ धार्मिक महत्व है या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण भी है। महाकुंभ मेला सिर्फ धार्मिक आयोजन ही नहीं है, बल्कि यह मनुष्य और ब्रह्मांड के बीच के रिश्तों का अद्भुत संगम है। 2025 में शुरू होने वाला महाकुंभ न सिर्फ करोड़ों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करेगा, बल्कि इसके आयोजन के पीछे छिपे खगोलीय और वैज्ञानिक तथ्यों पर भी प्रकाश डाला जाएगा।

महाकुंभ की शुरुआत

महाकुंभ की शुरुआत “समुद्र मंथन” की पौराणिक कथा से जुड़ी है। इस कथा के अनुसार देवताओं और दानवों ने अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन किया था। अमृत कलश से जो अमृत गिरा, वह प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक चार जगहों पर गिरा। ये स्थान कुंभ मेले के आयोजन के केंद्र बन गए। ‘कुंभ’ शब्द अपने आप में अमृत कलश का प्रतीक है, जो अमरता और आध्यात्मिक पोषण का प्रतीक है।

खास बात

आपको बता दें कि प्रयागराज के महाकुंभ शुरू होने में बस कुछ ही दिन शेष रह गए है। जहां तमाम अखाड़े अपनी पेशवाई कर रहे है और लोग दूर-दूर से मेले में पहुंच रहे है।

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